Sunday, March 22, 2015

सफर में कदम जो तुम्हारे संग हैं


कंटीले पथरीले रास्ते भी सहज हैं सफर में कदम जो तुम्हारे संग हैं| कभी खुशियों का दिन है निकला, तो कभी दुःख की है अमावस्या आई । कभी ऊंचाइयां चढ़ना सरलता से कभी हलकी ढल से फिसल जाना । मोगरे की खुशबु मसखरों की जादूगरी है सफर में कदम जो तुम्हारे संग हैं ॥ अरुणेश नारायण

Friday, October 3, 2014

हजारों ख्वाहिशें ऐसी


हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमाँ, लेकिन फिर भी कम निकले ||
                                                     - मिर्जा गालिब

Life is very unpredictable just like the game of cricket, until the last has been bold nothing can be said.It should be this way only to keep the interest in game/life. Instead we wan everything to be happen as planned so now how is that possible, isn't it against the law of nature ?

What i have learnt so far from my journey is life will always leave you at a point where you will find two ways out ,now its up to your wisdom and farsightedness to choose the right path.One way to be on rule take whatever is coming to your way and another is to do whatever it takes to get there .obviously other one would be tough path to choose. You may not achieve what you looked for in first attempt.It may takes you year but at least you will not regret whole life not been tried for.

I wish to return ,return to my village.I want to do farming and develop it to improve conditions of farmers with small piece of land.You can be happy without money but you can't be "SUKHI" without money .So i want to make good money out of farming for people of Patahi.I want to earn enough to open a institution with capable teachers to provide education free to them.

I want to do lot many things which my mind reminds me everyday but for all this to achieve i have to leave my current job. I have to answer all question even i don't wish to my parents and other so called my well wishers . I have to choose this tough path .I have to be this DO-er .

Kahi pahuchne ke liye ,jahan hain wahan se to nikalna ho padta hai.

I have a brilliant blue print and wish to execute plans very soon .I bow to you my Lord.

Sunday, September 21, 2014

Who is a father? A father is probably one of the most important persons in everybody’s life – apart from mothers. When I sit back and think about the mysterious ways in which God works, I am completely spellbound by the sheer intricacy with which everything is weaved. Yet, the intricacy seems very simple and easily understandable as time passes.
When I was a kid – an extremely difficult child to handle with too many tantrums – I remember feeling terrified of my father all the time. Frankly speaking, I never felt scared of my mother no matter how strict she was, but the moment I would see my dad’s face turn red with anger, I knew it was time to go into hibernation.
Despite all the scolding, the bickering, the drama and the arguments, I have always considered my dad my BFF. A father plays a very very important role when it comes to his children. Personally, for me, getting to spend time with my father is probably the best thing for me in the world. To hell with late night parties and sleepovers... when I have my dad by my side, I don’t need anything else.
As time passed and I had to leave home to pursue higher studies, things seemed to have changed. The newly-found freedom got into my head and I kind of ignored my entire family for a very long time as I was totally on my own. I clearly remember my parents getting extremely miffed with me for not being able to spare even 5 minutes in a day to ask how they were, and to tell the truth, I found it extremely amusing and at the same time annoying, because I felt my freedom was being hindered.
It has been 7 years since I have been away from home, but I have somehow taken a U-turn and gone back to being what I really was before I left home and became a free bird. Staying away from my loved ones – my father, especially – made me realise how important it is to have somebody you can blindly trust without even thinking about anything.
A father is undoubtedly the best guide a child can have – that too right at home. Sadly, most kids take their fathers for granted, regarding their advices to be completely useless. It is not just a saying that it is very important for a child to have a father in his life, it is indeed a proven fact.
A few lines more :
कितना भय होता था 
कुछ करने का ,
जो गलत प्रतीत होता था,
अद्भुत ये संयोग जुड़ा ,
गलत करने कहने से रोका ॥

हंसी हंसी में ही सत्य -असत्य 
समझा देते थे ,
बिन बोले ही, गूढ़ रहस्य 
बटला देते थे ॥
हृदय से कोमल ,भेष कठोर 
नारियल सरीखे, बाबूजी ॥

Sunday, March 9, 2014

यूँ मौन बने रहते हो क्यों

हे! युवा शक्ति सखा मेरे 
भविष्य निधि भारतवर्ष कि ॥

नत मस्तक गर्व वहन करते 
यौवन कि ऊर्जा संचित किये ॥

हे ! ओज भरे युवा बता दो 
यूँ मौन बने रहते हो क्यों ?
मिटटी के होते बंटवारों में 
झुलसते भ्रष्टाचारकए ज्वालाओं में 
हृदय विदारक रोदन भारत माँ कि

सुन अनसुनी करते हो क्यों ?

बेला विश्राम कि बीत चली अब
घरा धैर्य कि उपट चुकी अब
जागो अपनी इस चीर निद्रा से 

दुर्बल नहीं, हो क्यों छुपते तुम ?
हे! युवा शक्ति सखा मेरे 
भविष्य निधि भारतवर्ष कि ॥।
मिन्नतें है तुम्हारी नज़रों से 

एक झलक दे मुझे उबार दे ।



होठों कि सुर्ख़ियों से अपनी


हंसी में लपेट मेरा नाम उछाल दे ॥


दिल कि धड़कने हो गयी हैं खामोश सी


अपनी धड़कनों से फिर ताल मिला दे|


ठहर गया हूँ यहाँ सफ़र में आके मैं 


जुल्फों कि छावं दे ये थकन उतार दे ॥



अभी तो रास्ता है काफी तय करना बाकि


दो कदम साथ चल मंज़िल करीब ला दे ॥


बस गुज़ारिश हैं तुम्हारी


इन नज़रों से,

एक झलक दे मुझे उबार दे ||

खुशबु ताज़ी है अभी

पतझड़ों के बाद भी
सुखी नहीं हैं पंखुड़ियां                 

खुशबु ताज़ी है अभी 
एक अरसे बाद भी ॥

                            हवाओं ने धुन
                            छेड़ी बांसुरी की
                            मध्धम मध्धम रहेगी
                            हम रहें न रहें यहाँ 
                            प्रेम गीत यों ही रहेगी
                            एक अरसे बाद भी ॥

याद है,
मुझे तुमने कहा था
वक़्त कि धर में बह जायेगी
सारी याद भी ,
क्यों मगर अब भी
वही ललक, आशा है इंतज़ार की
एक अरसे बाद भी ॥

                                           कई कसमें ,
                                           खायी थी हमने संग रहने की
                                           रेखायें हथेली कि भी कहती
                                           यही थी चाँद कि रौशनी में |
                                           क्या हुआ ऐसा की
                                           सारा मानचित्र बदल गया
                                           भूगोल के दूसरे छोर पे हैं दोनों
                                           पर साथ तेरा छूटा नहीं
                                           एक अरसे बाद भी ॥।

यादों ने परेशां कर रखा है

कल से ही तुम्हारी यादों ने परेशां कर रखा है 
शायद पड़ गयी है गठरी ढीली ,जिसमें
दिल रखा था बांध कर ॥

पथरीली हृदय में बहती नदी भी 
सुखी लगती है अब 
झरना जो बहता था आँखों से 
सूखी सी रहती है आजकल || 

कही हमने ग़ज़ल

नजर  में मेरी  जब आपका अक्स आया ||
दिल  ने तेरे  दिल में समा के कही ग़ज़ल  ||

प्यासे होठो को जब एक बूँद  न मिली ।
अपने आंसू से भिगो , कही हमने ग़ज़ल  ||

नैनों में  जो तैर रहे थे सुन्दर दृश्य , संग उनके |
अन्धेरा छटा तो मालूम पड़ा, ख्वाब थी वो ग़ज़ल  ॥

निश्चल सी पड़ी है, जो  खटिये पे  यहीं ।
सुने जो 'नेश' तेरे होठो से ,जी उठे ये मेरी ग़ज़ल ॥........... अरुणेश नारायण
aruneshnarayanShabd

Thursday, January 3, 2013

नये वर्ष की ढेरों शुभकामनायें

आप सब को शब्द की तरफ से नये वर्ष की ढेरों शुभकामनायें ।

नये हवाओं की गुनगुनाहट,
ये खुशबुओं की अटूट बारिश । 
नये बरस की ये दस्तकें हैं ,
नये से सपने नयी सी ख्वाहिश। 
नया जनम ले रही हैं उम्मीदें ,
मचल रहे हैं दिल रफ्ता रफ्ता ।।

जो तलाशना चाहा


दामिनी को समर्पित ।।

हालिया दिनों में जो भारतीय लड़कियों के आत्मविश्वास को झंझोर कर रख देने वाली अमानवीय घटनाएँ सामने आई हैं उसके लिए हम किसे दोषी ठहराएँ । इस समाज को ,कानून व्यस्था को या फिर कुछ मानसिक विकृत पुरुषो की सड़ी-गली घिनौनी मानसिकता को ।क्या दो लोगो के बीच होती जा रही प्रेम की कमी भी जिम्मेदार है इस घटना के लिए ? अगर हाँ तो ये निकट भविष्य की बड़ी विपदा की ओर संकेत कर रही है ।इक लड़की तो बस प्रेम देखना चाहती है किसी के भी आँखों में ,हवस नहीं ।भगवान सबकी रक्षा करें ।

जिसे मैंने तुम्हारे आँखों
मन  और हाव- भाव में
तलाशना चाहा
तुम उसे मेरी
जिस्म की परतो में
अनुभव करते गये।
तुम्हारा अस्तित्व
एक संवेदना का
सोचा बनकर रहा ,
तुम निस्पृह ,निर्द्वंद
भाव से परे रहकर
पार चले गये ।।

                    :- अरुणेश नारायण

Tuesday, December 25, 2012


जन्मदिवस की शुभकामना दे रहा हूँ उस जननायक को ।
कर्मनिष्ठ ,कर्त्यापारायण , जनगण के सुखदायक ।।

सरहद पर नापाक इरादों ने की है गोलीबारी ।
कारगिल ही बतलाया है ,क्या हैं अटल बिहारी ।।

राजनीती में कौन दूसरा इतना पाक रहा है ।
बड़े-बड़े सूरमाओं के दमन में दाग रहा है ।।

निष्कलंक ,निष्काम,कर्मरत,आजीवन ब्रहमचारी।
कारगिल ही बतलाया है ,क्या है अटल बिहारी ।।

                                                                         जय जवान ,जय किसान कह के मन बढाया ।
                                                                         जय विज्ञानं को जोड़ कर तुमने द्विगुणित कर दिखलाया ।।

                                                                         एक हाथ में कमल ,एक हाथ में चिंगारी ।
                                                                         कारगिल ही बतलाया है क्या है अटलबिहारी ।।

Wednesday, September 26, 2012


सोचता हूँ कुछ और,
               होता कुछ और है।
मन  में होता क्षोभ है,
             चित रहता न ठौर है।।

मन  की बातें
             मन में रह जाती हैं ।
आशा की कलियाँ
            खिल नहीं पाती हैं।।

ऐसा लगता है मानो
           मानव  विवश लाचार है ।
उसकी जीवन नैया का
           कोई और कर्णधार है ।।

सारे सृष्टि का
           नियंत्रण कक्ष कहीं और है ।
जहाँ से होते नियंत्रित
           जीव मात्र सर्वत्र हैं ।।
 

Wednesday, September 19, 2012


माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक बालक को उत्पन्न करके उसे अपना द्वारपाल बना दिया।आज उस बालक गणेश का जन्मोत्सव है।गणेश चतुर्थी है आज ,यानि  की आज  गणेश जी का हैप्पी बर्थ डे है।तो जाहिर सी बात है की बहुत व्यस्त होगा आज उनका कार्यक्रम ।सभी देवी-देवता उन्हें बधाई देने आये होंगे ,और खली हाथ तो कोए आये नहीं होंगे ,तोहफे लाये होंगे ।फिर वो हमें कैसे याद करेंगे ।इसलिए कुछ अलग शब्दों में उनकी वंदना करनी होगी ,उनका ध्यान इस भक्त पे खीचने के लिए ।

गुड गॉड गणपति गणनायक,
सुन लेना प्रेयर  हमारी  जी,
 है मदर पार्वती,फादर शिव,
है रैट  पे तेरी सवारी जी  ।।

यू आर आलवेज़ ग्रेट गॉड ,
होता पूजन फर्स्ट तुम्हारा है,
स्टार में शाइनिंग होते हो ,
रेनबो में नूर तुम्हारा है ।।

तेरे साइज़ के ऑल गॉड
वर्शिप करते  तुम्हारा है,
एलिफैंट माउथ वाले स्वामी,
संकटहरण  नाम तुम्हारा है ।।

ओल्वेज़ संग रहें रिध्धि-सिध्धि ,
सारे गॉड  तेरे दरबारी जी ,
मदर पार्वती ,फादर शिव ,
ऑन रैट पे तेरी सवारी जी ।।

सर्वप्रथम आप सभी को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें ।भगवान् गणेश आप सभी के जीवन में सुख-समृधी लायें ।हम अपने प्रतिदिन के जीवन में खुद ही अपने देवी-देवताओं का मजाक बनाते रहते है ।गणेश पूजा के लिए प्रतिमा लेने बाज़ार जाते है तो दुकानदार से पूछते है ,ये गणेश कितने का है .दुकानदार बोलता है की २०० का है ।हम कहते है २०० का?? , क्या बात कर रहे हो भाई, इतना महंगा ..उधर तो ठेले पे सस्ते मिल रहे है ।भाई ठीक-ठीक दम लगाओ तो दो लूँगा...और घर लेजा के ,पूजा प्रतिष्ठा कर के भगवन से अरबों की सम्पति और सुख मांगते है ।भाईसाहब हिंदुस्तान का आदमी बहुत ही ज्यादा समझदार होता है ,'नहाये शेम्पू से पर जाये टेम्पू से'..
                   
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरुमेदेव सर्वकार्येशु सर्वदा ।।

Monday, September 17, 2012


आ जाओ पास मेरे की
नयन का सावन निमंत्रण दे रहा है।

आज तुमसे परे आ कितना व्यग्र है मन
लौट आओ प्राण! पास मेरे
प्रथम एहसास की सौगंध
प्रीत का बचपन निमंत्रण दे रहा है ।।

दूर रहती है रात को भी चाँद से चांदनी कभी ?
फुल से खुशबु , नींद से नयन कभी ?
लौट आओ हंसिनी !पास मेरे
'नेश' का समर्पण निमंत्रण दे रहा है ।।

पलकों में समाया है सुरमई चेहरा तेरा,
हो ना जाए आँख से ओझल नींद की बदलियाँ,
लौट आओ प्रिये ! पास मेरे ,
यह अकेलापन निमंत्रण दे रहा है ।।

आ जाओ पास मेरे की
नयन का सावन निमंत्रण दे रहा है।


Saturday, September 15, 2012


अच्छी कविता ना हो तो हम माफ़ी चाहते हैं ,बढ़ी हुए कीमते सुनकर तबियत स्ट्राईक पे है ।और इस महंगाई में यही इतना जुगाड़ हो पाया है ।आगे अगर महंगाई मैया की थोरी दया होगी तो, हम भी सुकून में होंगे और हमारी कविता भी ।धन्यवाद

आम आदमी की जेब फिर से कट गयी
पेट काट-काटकर की गयी बचत को दीमक चट गयी ।
डीजल और गैस की कीमतों ने फिर हडकंप मचाई है,
बहु ने अपने ससुराल में फिर से आग लगायी  है

(एक सुबह बढ़ी हुयी कीमतों के साथ शर्मा जी की सुबह हुयी , बड़े बेदम सी हुयी जान में उन्होंने याद आई की  कल रात तो खुद का चेहरा ही देख सोये थे ।पर इससे महंगाई का क्या सम्बन्ध ।खैर !)

हाँ , तो महंगाई से निपटने का कुछ जुगार सोच रहे थे
कोलगेट के बदले नीम के दातुन पर विचार कर रहे थे
दो दिनों से ठीक से नींद की गोद में सोये नहीं थे
कैसा होगा बजट गृहस्ती का इसी सोच में खोये हुए थे ।
महंगाई का सुबह से रटते -रटते जाप
न जाने कब लग गयी हमारी आँख ।

' आग लग गयी ........ आग लग गयी !
ऐसी आ रही थी आवाजें चारो तरफ  से
हर तरफ मची थी हाहाकार की अफरातफरी
लोग लगे हुए थे अपनी भागम - भागी में ।
हमने एक बंधु को  थामा, पूछा कहाँ लगी है आग ?
उसने घुरा हमको ऐसे जैसे, पगलाए गये हों आज ।

पैदल ही चल पड़े जिधर थी भीड़ की सरपट चाल
है स्कूटर हमारे पास ,पर उसकी क्या सुनाये बात,
 पेट की चिपकी टंकी में उसका कौन रखे ख्याल
आगे सड़क पे  कुछ गधे खिंच रहे थे एक कार
शर्मा जी देख कर ये घबराये,पैदल होने पे मुस्काए
आगे बढे देखा ,कुछ बालाएं विचार रही थी
छोटे-छोटे कपडे पहन महंगाई का विरोध कार रही थी
हमने कहा ,
ये सरकार थोरी और बढ़ा दो महंगाई
इस छोटे को अति छोटा कर दो

पेट में लगी आग इन नैनों से ही बुझा दो भाई ।।। 

Thursday, September 13, 2012


आज कल सरकारी दफ्तरों के रंग ढंग बड़े ही अलग हैं ।हर तरफ हिंदी दिवस के पर्चे चिपके हुए है ।सुना है की ऊपर से आदेश आया है की हिंदी दिवस पूरी तरह से हिंदी में मनाया जाये :) ।और ये क्या ये महाशय जिनके कंधो पर समारोह की जिम्मेदारी है किसी से अंग्रेजी में बतियाते हुए मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित कर रहे हैं । हो गया न बेडा-गर्क हमारी परम पूजनीय हिंदी जी का ।हिंदी के हर शब्द में जो संस्कृति बसी है भारतवर्ष की उसे कृपया न खोये ।

" निराला , दिनकर ,पन्त ने हिंदी का मान बढाया
अब तो जैसे हिंदी में मंदी का दौर है आया ।
हे भारत-बन्धु निज भाषा को त्याग कर, मत  दूजे को अपनाओ,
हिंदी की कर अवहेलना मत खुद का अपमान कराओ ।"
हे हिंदी ,
तेरी भाषा -विधु की किरणें
होकर विकीर्ण धरती पर ।
मानवता का पथ प्रशस्त,
मनुजार्थ किया जगती पर ।
प्रेम -सलिल से सिंच -सिंच ,
बंधुत्व की लता लहराई ।
भारतीय संस्कृति सुमन की,
सरस सुरभि बिखराई ।
श्रधा सुमन चढ़ाता हूँ ,
तेरे चरणों में,  भाषा महान !
 हे हिंदी!, तुझे कोटि-कोटि प्रणाम ।.....जय हिंद जय हिंदी ।

Wednesday, September 12, 2012

डेवेलोपर बनने का खवाब

फाइल में डिग्री का अंबार  रखता हूँ ।
दिल पे रेफेरेंस का भार  रखता हूँ  ।
हर जगह , जगह है नहीं, खबर आती है ।
फिर भी डेवेलोपर  बनने  का खवाब रखता हूँ ।

प्रोगामिंग  का वृहत ज्ञान रखता हूँ ।
एक अदने से मौके की चाह  रखता हूँ ।
पीकर प्याला  विषरूपी तुकबंदी  का ।
सर पर अपने बेरोजगारी का ताज रखता हूँ ।

अच्छी प्रोफाइलस की तलाश रखता हूँ ।
कंसल्टेनसि  के कॉल की भरमार रखता हूँ ।
क्यों आप(MNC) मौका नहीं देते मुझको ।
मैं आईडिया कई  हजार   रखता हूँ ।।


Thursday, September 6, 2012

नया तौर


राजनीती , शब्द सुनते ही कीचड़ से भरे तालाब का प्रतिबिम्ब आँखों के सामने घूम जाता है ।हमने तो पढ़ा सुना था की कीचड़ से ही कमल निकलता है पर अब मानना मुश्किल हो गया है । अब तो खुलेआम इन नेतागण को गाली देने में न तो कोई हिचक रहा है और ना ही इन्हे सुनने से किसी को शर्म आ रही है ।मुझे लगता है की इन नेताओं ने देश बेचने से पहले अपनी शर्म बेच दी है ।मैं तमाम उन समाजसेविओं और देश हित में सोचने वाले भाइयों से अपील करता हूँ की अब अनशन और धरने से कुछ नहीं होगा ।हमें इन्हे इन्ही को समाज आने वाली भाषा में समझाना होगा । वो कहते हैं ना की " लात के देवता बात से नहीं मानता  है "......इसलिए कहता हूँ

                        " कि जो तौर है दुनिया का    उसी तौर से बोलो
                          कि बहरों का इलाका है      ज़रा जोर से बोलो "
                       

Monday, July 9, 2012

kya maine kho diya hai khud ko ya fhir khud ka pata bhul gya hun. khud hi khud se dur hua ja raha hun .
Unki yaad mein khud ki fikra hoti hai ya abhi bhi unhi ki fikra lagi hai mujhe. Kal subah ki hue barsat ke baad aasman kitna ssaf tha , barse bundo ne sab dho diya tha , dhekho to zara kaise hari ghas dhuli-dhuli si chamak rahi hai ,ek pyari si pink libas me khud ko lapete bachchi apne kisi dost ke pichhe bhag rahi hai aur us ladke ne bhagte-bhagte ek ped ke tane ko hila kar us ladki pe vo bunde fir se barsa di. kitni khubsurat hai hasi unki.Fir jabki sab saaf hai to ye mere dhundhlepan ko q saaf nahi kar pa raha , jabki ab nahi hun mai uski zindgi mein to fir vo mere pas hai kyon har wat rahta.Shayad yahi prem ka sachha swarup hai .Hridya chahta hai ki jo mai mehsus kar raha hun vo aisa kadapi na karen .Hey ishwar ye pida to mai sah leta hun par ye pida unhe v ho ye shayad na sah saku.

    " Mere khuda bas ek dua bachi hai meri,
      Kubul kar agar bande pe pyar aa jaye
      Dua bhi uske liye jo tera bhi pyara hai,
      Meri dua hai ki  usko karar  aa jaye "